मंगल देव (मांगलिक दोष)

#मंगल को बेवजह बदनाम किया गया है ? सबसे विस्फोटक और उलझन पैदा करने वाला प्रभाव आजकल राहु का ज्यादा दिखता है। विवाह में देरी कराने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शनि की होती है। ? मंगल विवाह में विलम्ब का मुख्य कारण नहीं है। ? मंगल खराब संगति में ही खराब फल देता है ? ? जब मंगल पर राहु, केतु, शुक्र या शनि का प्रभाव हो ? या जब वह छठे/आठवें भाव का स्वामी होकर सप्तम भाव में बैठे ▪ विशेषकर छठे भाव का स्वामी होकर — तब परेशानी बढ़ती है लेकिन — ✔ यदि 6 और 8 का स्वामी होने के साथ मंगल लग्नेश भी हो ➡ तब वह विशेष नुकसान नहीं देता। ? विशेष बात ? ? मंगल के साथ राहु/केतु की युति या दृष्टि नहीं होनी चाहिए ❌ वरना मंगल विस्फोटक रूप ले लेता है कई बार दांपत्य जीवन की समस्या दूसरे ग्रह योग से होती है पर दोष मंगल को दे दिया जाता है — क्योंकि वह पहले से बदनाम है। ‼️ मंगल आखिर है क्या? मंगल = ऊर्जा मंगल = उत्तेजना मंगल = अग्नि ऊर्जा जब देशभक्त और बुद्धिमान व्यक्ति के हाथ में हो → रचनात्मक और दुष्ट के हाथ में हो → विनाशकारी मंगल एक बंदूक जैसा है: ? सैनिक के हाथ में → सुरक्षा ? डाकू के हाथ में → विनाश ? मंगल + राहु/केतु → दिशाहीन और अति उत्तेजना ? मंगल + शुक्र → अधिक कामुकता ? सप्तम/अष्टम संबंध → एक्स्ट्रा मैरिटल का खतरा ‼️ लेकिन जब मंगल अकेला हो… ✔ पाप प्रभाव से मुक्त हो ✔ अपनी या मित्र राशि में हो ✔ शुभ भाव स्वामी हो ➡ तब दांपत्य नहीं तोड़ता ऐसे मंगल प्रधान व्यक्ति: • क्रोध जल्दी आता है — पर दूध के उफान जैसा • जल्दी शांत हो जाता है • गलती मान लेता है • दिल का साफ होता है • झूठ पसंद नहीं करता • संबंध तोड़ना नहीं चाहता ? संबंध तोड़ने का साहस पापी मंगल ही करता है ? इसलिए मंगल को सामान्य ग्रह की तरह देखें, एलियन की तरह नहीं। हर ग्रह अच्छे संग में अच्छा और बुरे संग में बुरा फल देता है। ? विशेष (प्रैक्टिकल अनुभव) ? किताबों में लिखा है: “मंगल + राहु = मंगली दोष खत्म” पर व्यवहार में देखा गया: ❌ मंगल + राहु → दुष्प्रभाव बढ़ जाता है मैंने जो अनुभव किया, वही आपके सामने रखा। सहमत होना या न होना — आपका विषय है। ‼️