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रक्षोघ्न सूक्त जाप (Rakshogon Sukt Jaap)

रक्षोघ्न सूक्त (Rakshoghna Sukta) ऋग्वेद का एक अत्यंत शक्तिशाली और तेजस्वी सूक्त है। इसका शाब्दिक अर्थ है "राक्षसों या नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला"। यह पाठ विशेष रूप से अदृश्य बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रु बाधा को जड़ से समाप्त करने के लिए किया जाता ह


1. रक्षोघ्न सूक्त जाप क्या है, क्यों और कब किया जाता है?

What is Rakshoghna Sukta Japa, why and when is it done?

  • क्या है: यह ऋग्वेद के 10वें मण्डल का 87वां सूक्त है, जिसमें ऋषि कुत्स आंगिरस ने अग्नि देव से राक्षसों और बुरी शक्तियों को भस्म करने की प्रार्थना की है।

  • क्यों: जब घर में कोई असाध्य बाधा हो, कोई तंत्र-मंत्र का प्रभाव महसूस हो, या घर के सदस्यों की अकाल मृत्यु का भय हो, तब यह अनिवार्य माना जाता है।

  • कब: इसे किसी भी अमावस्या, ग्रहण काल, मंगलवार, शनिवार या नवरात्रि के दौरान करना अत्यंत प्रभावशाली होता है।

2. लाभ और दोष मुक्ति

 2. Benefits and Demerits

  • लाभ: घर का सुरक्षा कवच (Auric Shield) मजबूत होता है, बुरी आत्माओं का प्रभाव समाप्त होता है और परिवार में भयमुक्त वातावरण बनता है।

  • दोष मुक्ति: यह मुख्य रूप से 'अभिचार दोष' (तंत्र-बाधा), 'नकारात्मक ऊर्जा', और 'प्रेत बाधा' जैसे गंभीर दोषों से मुक्ति दिलाता है।

3. मुहूर्त और समय 

3. Muhurta and time

हाँ, रक्षोघ्न सूक्त का अनुष्ठान मुहूर्त के अनुसार ही करना चाहिए।

  • शुभ नक्षत्र: भरणी, कृत्तिका, मघा या मूल नक्षत्रों में इसका आरंभ शत्रु और बाधा नाशक होता है।

  • समय: इसे रात्रि काल या गोधूलि वेला (शाम के समय) में करना अधिक प्रभावी माना गया है।

4. प्रमुख देवता, वेदी और मंत्र 

4. Principal deities(Devta), altars(Vedi) and mantras

  • प्रमुख देवता: इसके मुख्य देवता 'अग्नि देव' हैं (रक्षोहा अग्नि)। साथ ही हनुमान जी और भगवान नृसिंह की भी पूजा की जाती है।

  • वेदी निर्माण: 1. अग्नि वेदी (हवन कुण्ड): चौरस या त्रिकोणीय कुण्ड, जिसमें विशेष औषधियों से आहुति दी जाती है।

    2. सर्वतोभद्र मण्डल: समस्त वैदिक शक्तियों के आह्वान हेतु।

    3. कलश स्थापन: शांति और रक्षा के लिए।

  • मुख्य मंत्र: इस सूक्त का प्रथम मंत्र ही मुख्य है:

    "रक्षोहणं वाजिनं वाजयन्तमग्निं ब्रुवन्तः समिधा यविष्ठम्। स नः सिषातु यविष्ठो धिष्ण्याभिः स नः पातु यविष्ठो धिष्ण्याभिः॥"

  • न्यूनतम जाप: शास्त्रीय विधान के अनुसार इस सूक्त का 108 बार पाठ या मंत्रों का 11,000 जाप करना चाहिए।

5. ग्रंथों में उल्लेख और ब्राह्मण 

5. Mention in texts and Brahmins

  • उल्लेख: इसका मुख्य उल्लेख 'ऋग्वेद' में है। इसके अतिरिक्त 'अथर्ववेद' और 'शौनक संहिता' में रक्षात्मक कार्यों के लिए इसकी महिमा बताई गई है।

  • ब्राह्मण: इस कठिन और ऊर्जावान अनुष्ठान के लिए कम से कम 2 विद्वान ब्राह्मण आवश्यक हैं, जो वेदों के सस्वर पाठ में निपुण हों।


6. कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप के माध्यम से कैसे कराएं?

6. How to get it done through Kaivalya Astro App?

कैवल्य एस्ट्रो ऐप के माध्यम से रक्षोघ्न सूक्त का अनुष्ठान अत्यंत सुरक्षित और प्रामाणिक तरीके से संपन्न किया जा सकता है:

  1. बाधा विश्लेषण (Analysis): ऐप के 'Expert Call' फीचर से आप अपनी समस्या साझा कर सकते हैं। ज्योतिषी यह सुनिश्चित करेंगे कि क्या आपको वास्तव में रक्षोघ्न सूक्त की आवश्यकता है या किसी अन्य शांति की।

  2. सिद्ध ब्राह्मणों का चयन: रक्षोघ्न सूक्त का पाठ सस्वर (वैदिक स्वर के साथ) होना चाहिए। कैवल्य एस्ट्रो आपको ऐसे वैदिक पाठशाला से प्रशिक्षित ब्राह्मण उपलब्ध कराता है जो शुद्ध उच्चारण में दक्ष होते हैं।

  3. मुहूर्त चयन: ऐप का 'Muhurat' टूल आपको आपके स्थान के अनुसार वह सटीक समय बताएगा जब नकारात्मक शक्तियाँ सबसे कमजोर और अग्नि तत्व सबसे प्रबल होता है।

  4. ऑनलाइन अनुष्ठान (E-Pooja): आप घर बैठे ही लाइव वीडियो कॉल के माध्यम से संकल्प लेकर पूजा में सम्मिलित हो सकते हैं। पूजा के बाद रक्षा सूत्र (मौली) और भस्म आपके पते पर भेज दी जाती है।

  5. सुरक्षा कवच: पूजा पूर्ण होने के बाद ऐप के माध्यम से आप 'रक्षोघ्न यंत्र' भी प्राप्त कर सकते हैं, जिसे इसी सूक्त से अभिमंत्रित किया गया होता है।


सावधानी: रक्षोघ्न सूक्त एक बहुत ही 'उग्र' अनुष्ठान है, इसलिए इसे कभी भी स्वयं बिना किसी विद्वान आचार्य के मार्गदर्शन के नहीं करना चाहिए।

ध्यातव्य विषय:- अनुष्ठान सेवा राशि एक दिवसीय हेतु 21000 है | 

The ritual service amount is Rs 21000 for one day.

घर पर करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय अलग से देय होगा और सामग्री स्वयं से लानी होगी। 

If it is done at home, the travel expenses will be payable separately and the material will have to be brought by yourself.