महामृत्युंजय अनुष्ठान साधना(Mahamrityunjaya Ritual Sadhana)
लघु अनुष्ठान सेवा राशि- 35000/
Small ritual service amount- 35000/-
पूर्ण अनुष्ठान- 71000/
Complete ritual- Rs. 71000/-
सुविधाएं(Facilities) * वाराणसी के विभिन्न विशिष्ट ब्राह्मणों द्वारा महामृत्युंजय का विधिवत अनुष्ठान एवं एक दिन यजमान के रहने की पूर्ण सुविधा भोजन सहित//
महामृत्युंजय अनुष्ठान भगवान शिव को प्रसन्न करने और असाध्य रोगों, अकाल मृत्यु के भय और संकटों को टालने के लिए किया जाने वाला सबसे प्रभावशाली अनुष्ठान है।
यहाँ इसकी पूरी जानकारी आसान शब्दों में दी गई है:
Here is its complete information in simple words:
1. महामृत्युंजय मंत्र
अनुष्ठान के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है:
This mantra is chanted during the ritual:
"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥"
2. अनुष्ठान की विधि (Step-by-Step)
2. Step-by-Step Method of the Ritual
यह अनुष्ठान स्वयं भी किया जा सकता है, लेकिन सवा लाख जाप के लिए विद्वान पंडितों की सहायता लेना उचित रहता है।
* संकल्प: सबसे पहले हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र और अपनी मनोकामना (जैसे रोग मुक्ति) बोलकर संकल्प लें।
* स्थापना: चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। साथ ही कलश स्थापना करें।
* माला: इस अनुष्ठान में केवल रुद्राक्ष की माला का ही प्रयोग किया जाता है।
* दिशा व आसन: कुश के आसन पर बैठें और अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
* शुद्धता: अनुष्ठान के दौरान तन और मन की शुद्धता अनिवार्य है। दीपक (शुद्ध घी का) पूरे समय जलते रहना चाहिए।
3. जाप की संख्या और समय (कितने दिन)
3. Number of chants and time (how many days)
अनुष्ठान की अवधि आपके द्वारा तय किए गए जाप की संख्या पर निर्भर करती है:
| अनुष्ठान का प्रकार | मंत्र संख्या | अवधि (लगभग) |
|---|---|---|
| लघु अनुष्ठान | 11,000 जाप | 2 दिन |
| पूर्ण अनुष्ठान | 1,25,000 (सवा लाख) |5 दिन |
> विशेष: सवा लाख जाप के बाद उसका 10% (यानी 12,500 बार) हवन करना अनिवार्य माना जाता है, तभी अनुष्ठान पूर्ण होता है।
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4. लाभ और परिणाम
4.Benefits and Results
इस अनुष्ठान के प्रभाव अत्यंत सकारात्मक होते हैं:
* अकाल मृत्यु से रक्षा: यह कुंडली के मृत्यु योग या दुर्घटनाओं को टालने में सहायक है।
* गंभीर रोगों में राहत: यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार है, तो यह संजीवनी की तरह काम करता है।
* मानसिक शांति: भय, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
* ग्रह शांति: विशेषकर शनि और राहु के दोषों को शांत करने के लिए यह सर्वोत्तम है।
5. जरूरी नियम (सावधानियां)
5. Important rules (precautions)
* खान-पान: अनुष्ठान के दौरान केवल सात्विक भोजन करें। मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का त्याग करें।
* ब्रह्मचर्य: पूरी अवधि के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें।
* मंत्र की लय: मंत्र का उच्चारण न तो बहुत तेज हो और न ही बहुत धीमा। माला फेरते समय मंत्र स्पष्ट होना चाहिए।