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बृहस्पतिवार व्रत कथा (Thursday Fast Story)

बृहस्पतिवार (गुरुवार) का व्रत भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। यह व्रत सुख, संपत्ति, विद्या और वैवाहिक आनंद की प्राप्ति के लिए अचूक माना जाता है।


1. नवग्रह में यह वार किस ग्रह का है?

1. Which planet's day is this in the Navagraha?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दिन 'बृहस्पति ग्रह' (Jupiter) का माना जाता है। बृहस्पति को सभी ग्रहों का 'गुरु' कहा जाता है, जो ज्ञान, धर्म, और विस्तार के कारक हैं।

2. यह व्रत कब और किसे करना चाहिए?

2. When and who should observe this fast?

  • शुभ समय: किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से इस व्रत को शुरू करना चाहिए। (पौष के महीने में इसे शुरू नहीं करना चाहिए)।

  • अवधि: लोग अक्सर 16 गुरुवार का व्रत रखते हैं और 17वें गुरुवार को उद्यापन करते हैं।

  • किसे करना चाहिए:

    • जिनके विवाह में बाधा आ रही हो।

    • विद्यार्थी जिन्हें एकाग्रता और ज्ञान की आवश्यकता है।

    • जो आर्थिक तंगी से जूझ रहे हों।

    • संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्ति।

3. व्रत के नियम और विधि

3. Rules and methods of fasting

गुरुवार के व्रत में शुद्धता और पीले रंग का विशेष महत्व है:

  • पीला रंग: इस दिन पीले वस्त्र पहनें, पीले फूलों से पूजा करें और भगवान को पीला चंदन लगाएं।

  • केले के वृक्ष की पूजा: इस व्रत में केले के पेड़ की पूजा का विशेष विधान है। जल चढ़ाएं, चने की दाल और गुड़ का भोग लगाएं।

  • वर्जनाएं: इस दिन सिर धोना, कपड़े धोना, बाल काटना, नाखून काटना और घर का जाला साफ करना वर्जित माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इससे गुरु ग्रह कमजोर होता है और लक्ष्मी घर से चली जाती हैं।

4. खान-पान: क्या खाएं और क्या न खाएं?

4. Food and Drink: What to eat and what not to eat?

  • क्या खाएं: दिन में एक समय भोजन करें। भोजन में पीली वस्तुओं का सेवन करें (जैसे- बेसन का हलवा, पीले चावल, चने की दाल)।

  • क्या न खाएं: इस व्रत में नमक का सेवन वर्जित है। साथ ही, चूंकि केले के पेड़ की पूजा होती है, इसलिए इस दिन केला खाना वर्जित माना जाता है।


5. बृहस्पतिवार व्रत कथा (संक्षेप में)

5. Thursday fast story (in brief)

कथा के अनुसार, एक प्रतापी राजा था जो बहुत दानी था, लेकिन उसकी रानी को दान देना और धर्म-कर्म पसंद नहीं था। एक दिन भगवान विष्णु साधु का भेष धारण कर आए और रानी से भिक्षा मांगी। रानी ने कहा कि वह दान से तंग आ चुकी है और ऐसा उपाय चाहती है जिससे उसका सारा धन नष्ट हो जाए ताकि वह आराम कर सके।

साधु (भगवान) ने उसे गुरुवार के दिन वे सभी कार्य करने को कहे जो शास्त्रों में वर्जित हैं (बाल धोना, घर लीपना आदि)। सात गुरुवार के भीतर राजा का सारा राज-पाठ छिन गया और वे दरिद्र हो गए। बाद में जब रानी को अपनी भूल का एहसास हुआ, तो उसने फिर से विधि-विधान से गुरुवार का व्रत किया और भगवान की कृपा से उसका सुख-सौभाग्य वापस लौट आया।

6. वेदों और शास्त्रों में उल्लेख

6. Mention in the Vedas and scriptures

बृहस्पतिवार व्रत का महात्म्य 'पद्म पुराण' और 'स्कंद पुराण' में विस्तृत रूप से मिलता है। ऋग्वेद में बृहस्पति को 'ब्रह्मणस्पति' कहा गया है, जो प्रार्थनाओं और मंत्रों के अधिपति हैं। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, गुरु की कृपा के बिना मनुष्य को पूर्ण सुख और ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता।


7. कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप के जरिए पूजन

7. Worship through the Kaivalya Astro app

कैवल्य एस्ट्रो ऐप आपके आध्यात्मिक अनुष्ठान को डिजिटल रूप से सरल बनाता है:

  • विधि-विधान गाइड: ऐप में 'व्रत एवं त्योहार' सेक्शन के अंतर्गत आप बृहस्पतिवार व्रत की पूरी पूजन विधि स्टेप-बाय-स्टेप देख सकते हैं।

  • पीला पंचांग: गुरु ग्रह की स्थिति और राहु काल जानने के लिए ऐप के पंचांग का उपयोग करें ताकि आप सही समय पर पूजा कर सकें।

  • उपाय और दान: ऐप के जरिए आप जान सकते हैं कि आपकी राशि के अनुसार इस दिन किन पीली वस्तुओं (जैसे चने की दाल या सोना) का दान करना आपके लिए श्रेष्ठ रहेगा।

    नोट :व्रत कथा पूजन सेवा राशि 1500 है जिसमे पंडित जी पूजन व कथा करेंगे |

    Note: Vrat Katha Pooja Seva Rashi is 1500 in which Pandit ji will do the puja and katha.