Service

Astro provides online Puja service

पुरातन गृह प्रवेश (The entrance to the old house)

भारतीय सनातन धर्म में गृह प्रवेश एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है। पुरातन गृह प्रवेश (जिसे अक्सर पुराने घर में दोबारा प्रवेश या जीर्णोद्धार के बाद का प्रवेश भी कहा जाता है) का उद्देश्य घर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर उसमें सुख-शांति और समृद्धि का वास कराना होता है।

यहाँ आपके द्वारा पूछे गए सभी बिंदुओं की विस्तृत जानकारी दी गई है:


1. पुरातन गृह प्रवेश क्या है और क्यों किया जाता है?

1. What is the entrance to the ancient house and why is it done?

जब किसी पुराने घर को खरीदा जाता है, या लंबे समय से बंद पड़े घर में दोबारा रहने जाते हैं, या फिर घर का बड़ा रेनोवेशन (जीर्णोद्धार) कराया जाता है, तब पुरातन गृह प्रवेश किया जाता है।

  • उद्देश्य: घर के पुराने दोषों, नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) और पूर्व निवासियों के प्रभाव को दूर कर वास्तु देव को प्रसन्न करना।

2. इसे करने के लाभ

2. Benefits of doing it

  • मानसिक शांति: घर के सदस्यों के बीच कलह कम होती है और प्रेम बढ़ता है।

  • समृद्धि: आर्थिक तंगी दूर होती है और व्यापार/नौकरी में उन्नति मिलती है।

  • स्वास्थ्य: घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होने से बीमारियां कम होती हैं।

  • सुरक्षा: घर को ऊपरी बाधाओं और बुरी नजर से सुरक्षा मिलती है।

3. मुख्य देवता और पूजा

3. Main Deities and Worship

पुरातन गृह प्रवेश में मुख्य रूप से निम्नलिखित की पूजा होती है:

  • वास्तु पुरुष: घर के अधिपति देवता।

  • गणेश जी: प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता के रूप में।

  • नवग्रह: दसों दिशाओं और नौ ग्रहों की शांति के लिए।

  • कुलदेवी/देवता: परिवार की सुरक्षा के लिए।

  • क्षेत्रपाल: स्थान की रक्षा के लिए।

4. मुख्य मंत्र और जाप संख्या

4. Main Mantra and Chanting Number

इसमें मुख्य मंत्र वास्तु शांति मंत्र होता है:

"ॐ वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान् स्वावेशो अनमीवो भवान्। यत् त्वेमहे प्रति तन्नो जुषस्व शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे॥"

  • जाप संख्या: सामान्यतः पंडित जी द्वारा  21000 जाप करने का विधान है। सामूहिक पाठ में यह संख्या बढ़ाई जा सकती है।

5. अनुष्ठान की अवधि और ब्राह्मण

5. Duration of ritual and Brahman.

  • अवधि: यह पूजा आमतौर पर 1 दिन (लगभग 4 से 6 घंटे) की होती है। यदि विस्तृत शांति यज्ञ कराना हो, तो यह 3 दिन का भी हो सकता है।

  • ब्राह्मण: कम से कम 1 मुख्य आचार्य अनिवार्य है। हालांकि, विधि-विधान और जाप की संख्या के अनुसार  3 ब्राह्मणों को बुलाना श्रेष्ठ माना जाता है।

6. पूजन का उल्लेख

6. Mention of Worship

इसका उल्लेख मुख्य रूप से 'मत्स्य पुराण', 'भविष्य पुराण', और 'विश्वकर्मा प्रकाश' जैसे वास्तु ग्रंथों में मिलता है। नारद पुराण में भी गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त और विधियों का विस्तार से वर्णन है।


7. कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप के माध्यम से सहायता

7.Support through Kaivalya Astro App

कैवल्य एस्ट्रो ऐप आपकी पूजा को सुलभ और शास्त्रोक्त बनाने में मदद करता है:

  • शुभ मुहूर्त की जानकारी: ऐप में 'Muhurat' सेक्शन में जाकर आप अपनी राशि, तिथि और नक्षत्र के अनुसार घर के लिए सबसे सटीक शुभ मुहूर्त देख सकते हैं। यह ऐप पंचांग के जटिल गणित को सरल करके आपको सही समय बताता है।

  • पूजा बुकिंग: 1. ऐप के 'Dharmik aayojan' या 'E-Pooja' सेक्शन में जाएं।

    2. 'Vastu Shanti' या 'Griha Pravesh' सेवा का चयन करें।

    3. आप अपने क्षेत्र के अनुभवी और विद्वान ब्राह्मणों की प्रोफाइल देख सकते हैं।

    4. अपनी सुविधा के अनुसार तारीख और समय चुनकर Online Booking कर सकते हैं।

  • सामग्री और विधि: ऐप आपको पूजा की आवश्यक सामग्री (Checklist) की सूची भी प्रदान करता है ताकि आपकी तैयारी पूरी रहे।

    ध्यातव्य विषय:- एक दिवसीय पूजन शुल्क 21000 व तीन दिवसीय पुरातन गृह प्रवेश पूजन सेवा राशि 51000  है | 

    Note: The ritual service fee (Anushthan Sewa Rashi) is 21,000 for one day and 51,000 for three days.

    घर पर करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय अलग से देय होगा और सामग्री स्वयं से लानी होगी। 

    If it is done at home, the travel expenses will be payable separately and the material will have to be brought by yourself.